18 घंटे का सफर सिर्फ 3 घंटे में? सिलीगुड़ी कॉरिडोर में सेना का बड़ा प्लान
डोकलाम विवाद के बाद केंद्र सरकार सिलीगुड़ी कॉरिडोर में 4 बड़े सुरक्षा प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, जिससे भारतीय सेना की पहुंच बेहद तेज़ हो जाएगी।

18 घंटे का सफर सिर्फ 3 घंटे में? सिलीगुड़ी कॉरिडोर में सेना का बड़ा प्लान
वर्ष 2017 के जून महीने में हुए डोकलाम विवाद के बाद भारत सरकार ने पूर्वोत्तर सीमा की सुरक्षा रणनीति में ऐतिहासिक बदलाव किया है। चिकन नेक के नाम से मशहूर सिलीगुड़ी कॉरिडोर और सिक्किम क्षेत्र की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए केंद्र सरकार ने लगभग 4 प्रमुख सुरक्षा-इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर तेज़ी से काम शुरू कर दिया है। इस रणनीतिक पहल का सबसे बड़ा असर यह होगा कि भारतीय सेना सिलीगुड़ी तक का सफर 18 घंटे के बजाय महज 3 घंटे में तय कर सकेगी।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष देश से जोड़ने वाला एक बेहद संकरा और सामरिक रूप से संवेदनशील मार्ग है। अगले चार वर्षों के भीतर इस पूरे इलाके को देश का सबसे सुरक्षित सैन्य मार्ग बनाने की व्यापक तैयारी चल रही है।
उस रोज़ के विवाद से क्या बदला?
डोकलाम गतिरोध के बाद सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत महसूस की गई थी। इसके जवाब में सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की दिशा में कदम उठाए। इन सुरक्षा परियोजनाओं के पूरा होने के बाद किसी भी आपात स्थिति में भारतीय सैनिकों और भारी सैन्य हथियारों की आवाजाही में लगने वाले समय में भारी कमी आएगी।
वर्तमान में जिस रास्ते को तय करने में सेना को 18 घंटे तक का समय लग जाता था, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद वही दूरी केवल 3 घंटे में सिमट जाएगी। इससे पूर्वोत्तर सीमा पर देश की रक्षा व्यवस्था पहले से कई गुना अधिक मजबूत होगी।
परियोजनाओं का काम कब तक पूरा होगा?
सुरक्षा और परिवहन से जुड़ी इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम जारी है। आधिकारिक योजना के अनुसार, इन सभी चार बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को वर्ष 2029 तक पूरी तरह से संपन्न करने का लक्ष्य रखा गया है।
इन निर्माण कार्यों के पूरा होते ही पूर्वोत्तर भारत की ओर कनेक्टिविटी पूरी तरह बदल जाएगी और सामरिक दृष्टि से सेना को अभूतपूर्व बढ़त हासिल होगी।
मुख्य बातें एक नज़र में
- डोकलाम विवाद के बाद केंद्र सरकार ने 4 सुरक्षा-इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स शुरू किए।
- सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) और सिक्किम क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है।
- सैन्य आवाजाही का समय 18 घंटे से घटकर केवल 3 घंटे रह जाएगा।
- अगले चार वर्षों में कॉरिडोर को सबसे सुरक्षित सैन्य रास्ता बनाने की तैयारी है।
- सभी चारों प्रोजेक्ट्स को वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
आगे क्या होगा असर?
सिक्किम और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होने से न सिर्फ सेना की परिचालन दक्षता बढ़ेगी, बल्कि यह क्षेत्र सुरक्षा के लिहाज से पूरी तरह से ढाल में बदल जाएगा। वर्ष 2029 में इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने के साथ ही चिकन नेक इलाके में भारत की स्थिति बेहद मजबूत हो जाएगी।




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