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इंदौर में 22 मीटर की ऊँचाई पर दौड़ेगी ज़िंदगी! MP का पहला थ्री-टियर फ्लाईओव्हर शुरू, लवकुश चौराहे पर जाम से आज़ादी

24 जुलाई 2026 · 7 बार पढ़ा गया ·1 मिनट पढ़ें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 175 करोड़ के डबल डेकर ब्रिज की एक भुजा का किया लोकार्पण, बोले- 'इंदौर और विकास एक-दूसरे के पर्याय'

इंदौर में 22 मीटर की ऊँचाई पर दौड़ेगी ज़िंदगी! MP का पहला थ्री-टियर फ्लाईओव्हर शुरू, लवकुश चौराहे पर जाम से आज़ादी

मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर ने गु्रुवार को इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शहरवासियों को 175 करोड़ रुपये की लागत से बने प्रदेश के पहले डबल लेयर (थ्री-टियर) फ्लाईओव्हर ब्रिज की पहली भुजा की सौगात दी। लवकुश चौराहे पर आकार ले चुका यह मेगा-प्रोजेक्ट सिर्फ एक ब्रिज नहीं, बल्कि 'विकसित इंदौर-विकसित मध्यप्रदेश' के विज़न को धरातल पर उतारती एक आधुनिक मिसाल है। इस मौके पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि "इंदौर और विकास अब एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जारी यह विकास यात्रा सिंहस्थ-2028 के लिए इंदौर-उज्जैन मार्ग को एक नई गति और सुगमता प्रदान करेगी।" इस अवसर पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक रमेश मेंदोला, गोलू शुक्लासुमित मिश्रा सहित संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा एवं IDA के CEO डॉ. परीक्षित झाड़े प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

इंजीनियरिंग का अद्भुत करिश्मा : इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका 'थ्री-टियर' (त्रिस्तरीय) ट्रैफिक मॉडल है, जो लवकुश चौराहे के भारी ट्रैफिक को तीन अलग-अलग स्तरों पर पूरी तरह से मुफ़्त और निर्बाध बनाएगा:

पहला स्तर (Ground Level): चौराहे का सामान्य स्थानीय यातायात।

दूसरा स्तर (Middle Level): वर्तमान फ्लाईओव्हर एवं मेट्रो रेल कॉरिडोर।

तीसरा स्तर (Top Level): नया डबल लेयर फ्लाईओव्हर (जहाँ से गाड़ियाँ फर्राटा भरेंगी)।

जानिए ब्रिज के बारे में

कुल लागत: ₹175 करोड़

लेंथ और हाइट: 1450 मीटर लंबा और जमीन से 22 मीटर की ऊँचाई पर स्थित।

स्टील बो-स्ट्रिंग गर्डर: 65 मीटर लंबे और 24 मीटर चौड़े स्पान पर 400-400 टन वजनी दो विशालकाय स्टील गर्डर (कुल 800 टन स्टील) का इस्तेमाल।

लैंडस्केपिंग & ब्यूटीफिकेशन: फ्लाईओवर के नीचे ग्रीन बेल्ट, आधुनिक लैंडस्केपिंग, हॉर्टीकल्चर और विश्वस्तरीय एलईडी लाइटिंग का काम शामिल।

आम जनता को मिलेगा यह फायदा

समय और ईंधन की बचत: बाणगंगा और अरविंदो अस्पताल की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को घंटों के जाम से मुक्ति मिलेगी।

सिंहस्थ-2028 की तैयारी: उज्जैन-इंदौर रूट पर श्रद्धालुओं और भारी वाहनों का आवागमन बेहद सुरक्षित और सुगम होगा।

दूसरी भुजा भी जल्द: फिलहाल अरविंदो से बाणगंगा वाली भुजा को चालू किया गया है, जबकि दूसरी भुजा का काम अंतिम चरण में है और जल्द ही इंदौरवासियों को समर्पित किया जाएगा।


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