सोनीपत: वृद्ध पिता का अंतिम संस्कार, बेटियां वीडियो कॉल पर क्यों रोईं?
सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में 74 वर्षीय शिवचरण गुप्ता का निधन हुआ, और उनकी बेटियों ने वीडियो कॉल पर ही अंतिम संस्कार देखा, जबकि उन्होंने जीते जी नेत्रदान किया था।

सोनीपत: वृद्ध पिता का अंतिम संस्कार, बेटियां वीडियो कॉल पर क्यों रोईं?
हरियाणा के सोनीपत में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहाँ एक 74 वर्षीय बुजुर्ग पिता का निधन वृद्धाश्रम में हुआ और उनकी तीन बेटियों ने अंतिम संस्कार की रस्मों को वीडियो कॉल पर देखा। यह घटना समाज में बुजुर्गों के प्रति बढ़ती उपेक्षा और पारिवारिक रिश्तों की जटिलता पर कई सवाल खड़े करती है।
शिवचरण रामरत्न गुप्ता नाम के इस बुजुर्ग ने अपनी ज़िंदगी में ही नेत्रदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद, उनकी आँखों को दान कर दिया गया, जिससे दो लोगों को नई ज़िंदगी की रोशनी मिल सकेगी।
उस रोज़ वृद्धाश्रम में क्या हुआ था?
वृद्धाश्रम प्रबंधन के अनुसार, शिवचरण गुप्ता लंबे समय से आश्रम में रह रहे थे। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था। जब उनके निधन की खबर उनकी तीन बेटियों को दी गई, तो वे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सकीं।
आश्रम के संचालक ने बताया कि बेटियों ने ऑनलाइन माध्यम से अंतिम संस्कार के लिए पैसे भेजे और फिर वीडियो कॉल पर ही पिता की अंतिम यात्रा और रस्मों को देखा। यह दृश्य आश्रम के कर्मचारियों के लिए भी बेहद भावुक कर देने वाला था।
अंतिम इच्छा और उसका सम्मान
अपनी ज़िंदगी में ही शिवचरण गुप्ता ने अपनी आँखें दान करने का महान संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद, आश्रम प्रबंधन ने उनकी इस इच्छा का सम्मान किया और उनकी आँखों को दान कर दिया। इस नेक कार्य से दो ज़रूरतमंद व्यक्तियों को दृष्टि मिल सकेगी, जिससे वे दुनिया को फिर से देख पाएंगे।
मुख्य बातें एक नज़र में
- 74 वर्षीय शिवचरण रामरत्न गुप्ता का सोनीपत के वृद्धाश्रम में निधन।
- उनकी तीन बेटियां अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सकीं।
- बेटियों ने वीडियो कॉल पर देखीं अंतिम संस्कार की रस्में।
- ऑनलाइन माध्यम से भेजा गया अंतिम संस्कार का ख़र्च।
- शिवचरण गुप्ता ने जीते जी किया था नेत्रदान का संकल्प।
- उनके निधन के बाद उनकी आँखों का सफलतापूर्वक दान किया गया।
परिवारिक रिश्तों पर सवाल
यह घटना समाज में बुजुर्गों के अकेलेपन और परिवारिक संबंधों की बदलती तस्वीर को दर्शाती है। बेटियां क्यों नहीं पहुंच पाईं, यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है, लेकिन एक पिता का अंतिम संस्कार वीडियो कॉल पर देखना कई लोगों को सोचने पर मजबूर करता है।
हालांकि, शिवचरण गुप्ता का नेत्रदान का फैसला मानवता के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है, जो उनके जाने के बाद भी दो लोगों के जीवन को रोशन करेगा।
निष्कर्ष
सोनीपत की यह घटना हमें रिश्तों की अहमियत और बुजुर्गों के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी की याद दिलाती है। एक तरफ जहाँ आधुनिक तकनीक ने दूरी कम की है, वहीं दूसरी ओर यह हमें भौतिक उपस्थिति के महत्व पर भी विचार करने को कहती है। शिवचरण गुप्ता का नेत्रदान का महान कार्य निश्चित रूप से दूसरों को भी प्रेरणा देगा।

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