उज्जैन महापौर की भावुक पाती: "मेरे कार्यकाल की अंतिम सवारी, पालकी से हटे भीड़... आम भक्तों को मिलें बाबा महाकाल के सुलभ दर्शन"
कलेक्टर को पत्र लिख महापौर मुकेश टटवाल ने रखा व्यवस्था सुधार का प्रस्ताव, कहा- महाकाल की पालकी के पास न रहें रसूखदार, आगे चलें गणमान्य

"यह मेरे महापौर कार्यकाल की अंतिम श्रावण सवारी है। मैं एक सेवक के रूप में बाबा की सवारी में शामिल होकर अपनी सेवाएं तो समर्पित करूंगा ही, लेकिन मेरी इच्छा है कि दूर-दराज से आने वाले देश के लाखों आम श्रद्धालुओं को बाबा की एक झलक पाने के लिए तरसना न पड़े। उन्हें भी आसानी से दर्शन हो सकें। बाबा की पालकी के पास भीड़ न हो और एक सुव्यवस्थित व्यवस्था बनाई जाए।"
श्रावण मास की प्रसिद्ध भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारियों से ठीक पहले उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने कलेक्टर एवं महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष को एक बेहद भावुक और संवेदनशील पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में जहां एक तरफ अपने कार्यकाल की अंतिम सवारी होने का उल्लेख किया, वहीं दूसरी तरफ पालकी के आसपास होने वाली भीड़ का मुद्दा उठाते हुए आम श्रद्धालुओं को सुलभ दर्शन कराने की बात कही है।
"पालकी के पास सिर्फ कहार और पुजारी हों, ताकि न छिपें बाबा"
महापौर ने पत्र में बड़ी बेबाकी और संवेदनशीलता के साथ उस कड़वी हकीकत को बयां किया है, जिसे हर सोमवार सवारी मार्ग पर खड़ा आम भक्त महसूस करता है। उन्होंने लिखा है कि "यह देखने में आता है कि बाबा की पालकी के चारों ओर बड़ी संख्या में पंडित, पुजारी, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और प्रभावी समाजसेवी जमा रहते हैं। इस भारी-भरकम घेरे के कारण घंटों से धूप और बारिश में खड़े आम श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दर्शन ही नहीं हो पाते।"
महापौर का इनोवेटिव 'स्टेज प्लान' और सुझाव
● सुरक्षा का मजबूत घेरा: बाबा महाकालेश्वर की पालकी के चारों ओर पुलिस जवानों द्वारा रस्सी का और मजबूत व सुरक्षित घेरा लगाया जाए।
● पालकी के पास 'नो एंट्री': इस घेरे के अंदर सिर्फ पालकी उठाने वाले कहार (आवश्यकतानुसार) और पालकी के दोनों ओर केवल दो-दो पुजारी ही मौजूद रहें। इनके अलावा किसी भी रसूखदार को वहां रहने की अनुमति न हो।
● गणमान्यों के लिए अलग स्थान: प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों के लिए सवारी के आगे एक उपयुक्त स्थान (स्टेज) सुनिश्चित किया जाए, जहां वे गरिमा के साथ चल सकें और आम श्रद्धालुओं के दर्शन में बाधा न बनें।
"पहले आम लोगों से राय ली जाती थी, अब पत्र का सहारा"
महापौर मुकेश टटवाल ने अपने पत्र में पुराना दौर याद करते हुए थोड़ी कसक भी जताई। उन्होंने लिखा कि पूर्व में महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की बैठकों में इन व्यवस्थाओं पर गहन विचार-विमर्श होता था और आम जनता के सुझावों को भी शामिल किया जाता था। लेकिन वर्तमान व्यवस्थाओं को देखते हुए उन्हें पत्र के माध्यम से शासन-प्रशासन को इस गंभीर विषय से अवगत कराना पड़ रहा है।
इसलिए महत्वपूर्ण है महापौर का पत्र
महापौर मुकेश टटवाल का यह पत्र महाकाल सवारी व्यवस्थाओं के लिए खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल, श्रावण मास में उज्जैन की सड़कों पर लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है। ऐसे में पालकी के चारों ओर उमड़ने वाली रसूखदारों की अनियंत्रित भीड़ न सिर्फ आम श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करती है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा खतरा पैदा करती है। यदि प्रशासन बाबा की पालकी के आसपास की अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करता है, तो लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के सहज दर्शन कर सकेंगे और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर पाएंगे।

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