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पाकिस्तान से उठा फतवा: क्या पूरी दुनिया के मुस्लिमों के लिए 'हराम' हो जाएगी क्रिप्टोकरेंसी?

24 जुलाई 2026 · 5 बार पढ़ा गया ·1 मिनट पढ़ें

मु​स्लिम जगत में इस व्यवसाय पर छिड़ी है नई बहस, दुनिया की एक बड़ी आबादी कर रही है क्रिप्टोकरेंसी में इनवेस्टमेंट

पाकिस्तान से उठा फतवा: क्या पूरी दुनिया के मुस्लिमों के लिए 'हराम' हो जाएगी क्रिप्टोकरेंसी?

पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी दायरे में लाने के लिए जहां एक तरफ 'पाकिस्तान वर्चुअल एसेट्स रेगुलेटरी अथॉरिटी' (PVARA) नियम बना रही है, वहीं दूसरी तरफ दारुल उलूम कराची के एक फतवे ने वैश्विक मुस्लिम समुदाय के बीच एक नई वैचारिक जंग छेड़ दी है। जाने-माने इस्लामी विद्वान मुफ्ती तकी उस्मानी और अन्य उलेमा के हस्ताक्षर वाले इस फतवे में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए खरीदारी और व्यापार को 'हराम' (प्रतिबंधित) घोषित कर दिया गया है।

इस फतवे का मुख्य आधार यह है कि शरिया कानून के मुताबिक क्रिप्टोकरेंसी 'माल' या 'दौलत' (Wealth) की परिभाषा पर खरी नहीं उतरती, बल्कि यह केवल डिजिटल खातों में दर्ज काल्पनिक नंबरों का एक रिकॉर्ड मात्र है.

क्या यह फतवा दुनिया भर के मुस्लिमों पर लागू होता है?

इस फतवे के सामने आते ही यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या पाकिस्तान से उठी यह धार्मिक आवाज दुनिया भर के 2 अरब से अधिक मुसलमानों के वित्तीय भविष्य को प्रभावित करेगी? इस्लामी वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि शरिया में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर विद्वानों के बीच पहले से ही मतभेद हैं-

विरोध में तर्क: मिस्र, तुर्की और इंडोनेशिया के कुछ प्रमुख इस्लामी संगठनों ने पहले भी इसे सट्टेबाजी और अनिश्चितता (ग़रार) के कारण गैर-शराई माना है.

समर्थन में तर्क: इसके विपरीत, कई आधुनिक इस्लामी स्कॉलर्स का मानना है कि यदि कोई डिजिटल संपत्ति समाज में मूल्य (Value) रखती है और उसे डॉलर या सोने की तरह भुनाया जा सकता है, तो वह शरिया सम्मत है. खुद अर्थशास्त्री यूसुफ नजर ने मुफ्ती उस्मानी के फैसले को गलतफहमी पर आधारित बताया है.

क्या भविष्य में इस बिजनेस से दूरी बनाएंगे मुस्लिम निवेशक?

इस फतवे का सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक असर उन आम मुस्लिम निवेशकों पर पड़ सकता है जो मजहबी उसूलों के मुताबिक निवेश करना पसंद करते हैं. पाकिस्तान जैसे धार्मिक रूप से संवेदनशील समाज में, जहां लगभग 2 करोड़ लोग क्रिप्टो से जुड़े हैं, इस फतवे से कारोबार में कुछ गिरावट आ सकती है। लेकिन क्या मुस्लिम समाज भविष्य में इस बिजनेस से पूरी तरह दूरी बना लेगा? इसके आसार कम नजर आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आज की वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में क्रिप्टोकरेंसी विदेशों से बेहद कम लागत और तेज गति से धन भेजने का एक बड़ा जरिया बन चुकी है।

पाकिस्तान में संतुलन बनाने की कवायद

इस उलझन को सुलझाने के लिए PVARA के चेयरमैन बिलाल बिन साकिब ने मुफ्ती तकी उस्मानी से मुलाकात की है। दोनों पक्षों में इस बात पर सहमति बनी है कि ब्लॉकचेन, स्टेबलकॉइन और वास्तविक संपत्तियों के टोकनाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीकों को केवल एक ही लाठी से हांकने के बजाय शरिया और तकनीकी, दोनों पहलुओं से गहराई से परखा जाना चाहिए।

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