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54 लाख शिकायतें और सिर्फ 2.4% FIR? साइबर अपराध का ये कैसा सच!

19 सितंबर 2026 · 3 बार पढ़ा गया ·3 मिनट पढ़ें

देश में पिछले छह सालों में 54 लाख से अधिक साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि एफआईआर सिर्फ 2.4% मामलों में ही हो पाई।

54 लाख शिकायतें और सिर्फ 2.4% FIR? साइबर अपराध का ये कैसा सच!

54 लाख शिकायतें और सिर्फ 2.4% FIR? साइबर अपराध का ये कैसा सच!

कल्पना कीजिए, आप किसी धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, शिकायत करते हैं, लेकिन आपकी शिकायत पर कार्रवाई ही न हो। ऐसा ही कुछ हमारे देश में साइबर अपराध के मामलों में हो रहा है। पिछले छह वर्षों में, जब से ऑनलाइन ठगी और अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, तब से लेकर अब तक 54 लाख से भी ज़्यादा शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, लेकिन इनमें से मात्र 2.4% मामलों में ही साइबर अपराध की एफआईआर दर्ज हो पाई है। यह आंकड़ा वाकई चिंताजनक है और व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है।

यह स्थिति बताती है कि डिजिटल इंडिया के युग में जहाँ हर दिन नए ऐप और ऑनलाइन सेवाएँ आ रही हैं, वहीं अपराधियों के लिए भी नए रास्ते खुल गए हैं। आम आदमी को अब यह समझना होगा कि ऑनलाइन दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

आखिर क्यों नहीं हो पाती एफआईआर?

आप सोच रहे होंगे कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज होने के बाद भी एफआईआर क्यों नहीं हो पाती? इसके पीछे कई कारण हैं। सबसे पहले, साइबर अपराधों की प्रकृति ही ऐसी है कि इनमें अपराधी अक्सर दूर बैठे होते हैं और उनकी पहचान करना मुश्किल होता है। कई बार तो वे दूसरे राज्यों या देशों से ऑपरेट करते हैं।

दूसरा बड़ा कारण है पुलिसकर्मियों का साइबर अपराधों की जटिलता को समझने में प्रशिक्षण की कमी। ऐसे मामलों की जाँच के लिए विशेष तकनीकी ज्ञान और उपकरणों की आवश्यकता होती है, जो हर थाने में उपलब्ध नहीं होते।

शिकायतों का बढ़ता अंबार: एक भयावह तस्वीर

2019 से 2024 के बीच, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर कुल 53.93 लाख शिकायतें दर्ज की गईं। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि साइबर अपराधी कितनी तेज़ी से अपनी जड़ें जमा रहे हैं। 2017 की तुलना में शिकायतों में 78 गुना की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। यह सिर्फ आंकड़े नहीं, लाखों लोगों की गाढ़ी कमाई और उनके भरोसे के साथ हुआ खिलवाड़ है।

मुख्य बातें एक नज़र में

  • पिछले 6 सालों में 53.93 लाख से ज़्यादा साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज हुईं।
  • इनमें से केवल 1.30 लाख मामलों में ही एफआईआर हो पाई।
  • एफआईआर दर्ज होने की दर मात्र 2.4% रही।
  • 2017 की तुलना में साइबर शिकायतों में 78 गुना की वृद्धि हुई।
  • राज्यसभा की गृह मामलों की समिति ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
  • जांच में तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती है।

अब आगे क्या? सरकार की चुनौतियाँ

राज्यसभा की गृह मामलों से संबंधित समिति ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। समिति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस समस्या से निपटने के लिए एक मजबूत और प्रभावी तंत्र की आवश्यकता है। सिर्फ शिकायतें दर्ज करना काफी नहीं, बल्कि उन पर कार्रवाई होना ज़्यादा महत्वपूर्ण है।

सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है कि कैसे साइबर अपराधों की जांच प्रणाली को मजबूत किया जाए और पुलिस बल को आधुनिक तकनीकों से लैस किया जाए। साथ ही, आम जनता को भी ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति जागरूक करना बेहद ज़रूरी है।

निष्कर्ष

साइबर अपराध एक ऐसी चुनौती है जिसका सामना हर नागरिक कर रहा है। जब तक शिकायतें सिर्फ आंकड़ों का हिस्सा बनकर रह जाएंगी और उन पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक अपराधियों के हौसले बुलंद रहेंगे। यह समय है कि हम सब मिलकर इस डिजिटल खतरे से लड़ें और हमारी ऑनलाइन दुनिया को सुरक्षित बनाएं। उम्मीद है कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर जल्द ही कोई प्रभावी कदम उठाएगी।

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