92 दिन बाद खुले जंगल: कान्हा से बांधवगढ़ तक उमड़े पर्यटक, जानें पूरा सच
मध्यप्रदेश में 92 दिनों का मानसून ब्रेक खत्म होते ही टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए खुल गए हैं, शुरुआती हफ्ते की सफारी बुकिंग पूरी तरह पैक हो चुकी है।

92 दिन बाद खुले जंगल: कान्हा से बांधवगढ़ तक उमड़े पर्यटक, जानें पूरा सच
अगर आप घने जंगलों में बाघों की दहाड़ सुनने के शौकीन हैं, तो आपके लिए इंतज़ार की घड़ियां अब खत्म हो चुकी हैं। मध्यप्रदेश टाइगर रिजर्व के दरवाजे पूरे 92 दिनों के लंबे अंतराल के बाद सैलानियों के लिए फिर से खोल दिए गए हैं। मानसून ब्रेक समाप्त होने के साथ ही जंगल सफारी का रोमांच दोबारा लौट आया है।
आप सोच रहे होंगे कि इस बार का नज़ारा कैसा है, तो समझिए कि कान्हा और बांधवगढ़ जैसे मशहूर अभयारण्यों में पहले ही दिन से पर्यटकों का तांता लग गया है। प्रकृति प्रेमियों का उत्साह ऐसा है कि शुरुआती दिनों के सभी स्लॉट पहले ही भर चुके हैं।
सैलानियों की भारी भीड़ क्यों उमड़ी?
तीन महीने से अधिक समय तक जंगलों में मानवीय दखल पूरी तरह बंद रहने के बाद अब पर्यटकों का हुजूम उमड़ पड़ा है। बारिश का मौसम खत्म होते ही हरी-भरी वादियों के बीच वन्यजीवों की हलचल देखने के लिए लोग बेताब दिख रहे हैं।
शुरुआती हफ्ते के सभी सफारी स्लॉट पूरी तरह आरक्षित हो चुके हैं। दूर-दराज से पहुंचे वन्यजीव प्रेमी बाघों के दीदार की आस में सुबह-शाम के दौरों के लिए तैयार खड़े हैं।
कान्हा से बांधवगढ़ तक क्या है माहौल?
प्रदेश के प्रमुख वनों में शुमार कान्हा से लेकर बांधवगढ़ तक के अभयारण्य अब पूरी तरह गुलजार हो चुके हैं। जंगल के रास्तों पर पर्यटकों की गाड़ियां लगातार दौड़ती नजर आ रही हैं।
सैलानी न सिर्फ सफारी का आनंद ले रहे हैं, बल्कि वन क्षेत्रों में लागू समय-सारिणी और निर्धारित शुल्कों की जानकारी जुटाकर अपनी यात्राएं तय कर रहे हैं। वन्यजीव प्रेमियों के आगमन से स्थानीय पर्यटन में भी नई जान आ गई है।
मुख्य बातें एक नज़र में
- मध्यप्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्व 92 दिनों के अंतराल के बाद खुले।
- मानसून का विराम पूरा होने के साथ ही जंगल सफारी औपचारिक रूप से शुरू।
- कान्हा और बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यानों में पर्यटकों की भारी आमद देखी गई।
- सफारी के शुरुआती हफ्ते के लगभग सभी बुकिंग स्लॉट पहले ही फुल हो चुके हैं।
- सैलानियों के लिए सफारी का समय और शुल्क नियम के तहत लागू किया गया।
सफारी पर जाने वालों के लिए आगे क्या?
ज़रा ठहरिए, यदि आप भी जंगल की सैर का मन बना रहे हैं, तो बिना पूर्व योजना के सीधे पहुंचना निराशाजनक हो सकता है। शुरुआती दिनों में सीटों की मारामारी को देखते हुए समय पर बुकिंग सुनिश्चित करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।
कान्हा और बांधवगढ़ की वादियों में बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आने वाले दिनों में पर्यटकों की यह तादाद और अधिक बढ़ने की पूरी संभावना है।




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